निर्माता आमिर खान , किरण राव और लेखिका एवं निर्देशिका अनुष्का रिजवी द्वारा निर्देशित फिल्म पीपली लाइव मीडिया के उस सच को बयान करती है जिसकी कल्पना करना भी बेमानी लगता है . आज जब समाज के विभिन्न अंगों में मीडिया का दखल बढ़ता जा रहा है वह अपनी भूमिका का निर्वहन किस गैर जिम्मेदाराना तरीके से कर रहा है उसका प्रत्यक्ष प्रमाण है पीपली लाइव.
यद्यपि पीपली लाइव कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की कहानी है जो अपना कर्ज चुकाने के लिए अपनी ज़मीन बेचने पर विवश हैं.इन्हीं किसानों में एक है नत्था जो अपनी आत्महत्या के बाद सरकार से मुआवजे के रूप में मिलने वाली रकम से अपनी जमीन बचाने की बात करता है. इस खबर को सुनकर एक कथित खोजी पत्रकार इससे एक ब्रेकिंग न्यूज़ बना देता है जिसके बाद पूरा मीडिया पीपली गाँव में मेला लगा देता है. अपनी ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने के दौरान मीडियाकर्मिओ के अनाप शनाप सवालों से नत्था और उसका पूरा परिवार त्रस्त हो जाता है.नत्था मरेगा या नहीं मीडिया के लिए यही सबसे ज्वल्लंत मुद्दा है जबकि उसी गाँव का एक किसान जिसकी ज़मीन कर्ज के दवाब में बिक चुकी है अपनी रोजी रोटी के इंतजामात के दौरान गड्ढे में गिरकर मर जाता है. मीडिया के लिए यह उतनी बड़ी खबर नहीं है जितना कि नत्था.
फिल्म में एक पत्रकार राकेश जो मीडिया के सरोकारों को पुनः परिभाषित करने कि बात कहता है उसे यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि जिस प्रकार एक डॉक्टर और इंजीनियर अपना काम करते हैं उसी प्रकार हमें भी अपना काम करना चाहिए और हमारा काम है खबर बनाना न कि सत्य को प्रदर्शित करना.और यदि तुम ऐसा नहीं कर सकते तो और भी रास्ते है तुम्हारे पास. और अंततः ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने के दौरान उस पत्रकार की मौत हो जाती है जिसको नत्था के रूप में मरा जानकर मीडिया अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है.
इस पूरे प्रकरण में जितना दोष हमारे राजनेताओं का है उससे कहीं ज्यादा दोष मीडिया का है जो घटना की तह में जाने की बजाये इस बात में ज्यादा दिलचस्पी रखता है कि नत्था मरेगा या नहीं. नत्था बचेगा या नहीं इस सवाल को पूछने की जहमत किसी पत्रकार ने नहीं उठाई.
क्या इस घटनाक्रम में मीडियाकर्मिओं की ज़िम्मेदारी नहीं बनती की नत्था को आत्महत्या करने से रोके और सरकार पर इस संमस्या का समाधान करने के लिए दवाब डाले . आखिर टी.आर. पी. बढ़ने के अलावा और भी तो जिम्मेदारियां है मीडिया पर.

bahut acha likhte ho. aur bilkul sahi kaha media aaj bazaarvad ke changul me phans gaya hai. media aaj ek aisa parjeevi ban gya hai jo sirf TRP ke liye apne ya sach kahein to samaj ke satya ko bhool , khabar banane me laga hua hai
जवाब देंहटाएंthanks for dis post
mai pahke film dekhta hu fir aapki bato ki najar se taftish karunga.
जवाब देंहटाएंaur tab rai sahab ko apni rai de paunga.
waise aapne film ki samiksha likha hai ya maujuda media ki.
bat jo bhi likhi hai aapne jabardast kiha hai.
shukriya !!!!!!!!!!!!!!!!!!
media , rajneeti, judicial system aur apni beurocrocy k jariye kuchh log is desh par shasan karte hai inme se koi ek sudhar jae iski ummeed kabhi mat karna
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