शनिवार, 14 अगस्त 2010

इब्तिदा

आखिरकार मैं  भी ब्लॉगरों की जमात में शामिल हो ही गया.और ऐसा हो भी क्यों न? भूमंडलीकरण के इस युग में जब दुनिया और भी अधिक छोटी होती जा रही है और लोग और भी अधिक संवेदनहीन तथा स्वार्थपरक,लोगो तक अपने विचारो की अभिव्यक्ति का इससे बेहतर माध्यम और हो भी क्या सकता है.
                                                              कोशिश यही रहेगी कि इस माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बातों को निष्ठापूर्वक  रख सकूँ   

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